संगीतमय श्रीमद भागवत एवं वैदिक अनुष्ठान कर्ता
आचार्य पंडित कृष्णकांत भारद्वाज जी, उज्जैन के अनुभवी एवं विद्वान पंडित, पिछले 10+ वर्षों से शास्त्रसम्मत विधि-विधान के अनुसार पूजा-अनुष्ठान कराते आ रहे हैं। महाकाल की नगरी में जन्मे और पले-बढ़े होने के कारण, इन्हें वेद, पुराण और संहिताओं का गहन अध्ययन तथा पारंपरिक पूजा-पद्धति का व्यापक अनुभव प्राप्त है। कालसर्प पूजा विशेषज्ञ होने के नाते गुरुजी को 10 वर्षों का अनुभव पूजा आयोजित करने में प्राप्त है, आचार्य पंडित कृष्णकांत भारद्वाज दुवारा कि गई सभी पुजाये अर्थात कालसर्प दोष पूजा, मंगल भात पूजा, पितृ दोष पूजा, महामृत्युंजय जाप, अर्क/कुंभ विवाह, नव ग्रह शांति, बगलामुखी अनुष्ठान एवं विशेष विवाह एवं संतान प्राप्ति का उत्कृष्ट परिणाम तुरंत प्राप्त होता है।
विशेष :-
विक्रांत भैरव हवन अनुष्ठान|
ऑनलाइन पूजन की जाती है |
ऑनलाइन बुकिंग भी की जाती है
सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं तो उस स्थिति को "कालसर्पयोग" कहते हैं।
मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को मांगलिक माना जाता है|
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं।
पित्र दोष पूजन निवारण और इस पूजन से क्या क्या फल यजमान को प्राप्त होता है मुख्यपितृदोष तीन प्रकार का होता है|
बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो, तो गुरू चाण्डाल योग निर्माण होता है।
यदि लड़के अथवा लड़की की कुंडली में सप्तम भाव अथवा बारहवां भाव क्रूर ग्रहों से पीडि़त हो अथवा शुक्र, सूर्य,
सप्तमेष अथवा द्वादशेष, शनि
से आक्रांत हों।
महर्षि नारद के अनुसार- अनेन विधिनां सम्यग्वास्तुपूजां करोति य महर्षि नारद के अनुसार- अनेन विधिनां सम्यग्वास्तुपूजां करोति य:||